“जेरे तमो एकाणू करो, ते मुडू लटकावीनी कपटीयो ने हरका नकी देको। केमके वा आपड़े मुडू बणावी राकी हे, ताकि मनका वणय एकाणा वाला जाणी हे। मुँ तमय हू हासु कऊँ हूँ के, वणय वणनू फल पेलेहुस मली सुकू हे। पण जेरे तु एकाणू करे ते आपड़े मुडू तुई दे नी मुड़ माते तेल लगाड़ीनी पोता ने अभिसेक कर। ताकि मनका नीं जाणे पण तारे बाप जी वगर डिटो हे, तय एकाणा वालो जाणे। पण तारे परम बाप जणाय तु जुई नीं हके हे, जुए के, तु एकाणू करी रेजो हे। तेरे तारे परम बाप जी हापीनी किदू गियू कामे जुए हे, तय इनु फल आलहीं।