इण वास्तै म्हैं चावूं हूं की हरैक जगा मिनख, बिना रीस अर विवाद रै साचै मन ऊं हाथो नै उठायनै पराथना किया करै। व्यौंही लुगाईयां भी मांन अर समझदारी रै साथै सुहावनै कपड़ो ऊं अपणै आप नै संवारे, न की बाल गूंथनै अर सोने अर मोतियो अर बहुमोल कपड़ो ऊं, पण भलै कांमां ऊं। क्यूंकै परमेसर री भगती करणैवाळी लुगाईयां नै ओहीज उचित है।