थरवा अपन जन्नीहे ओकर पूरा भोजाहा सुख देहे, और अस्तेहेँके जन्नी फेन अपन थरवाहे पूरा भोजाहा सुख देहे। जन्नीहे ओकर अपन शरीरमे अधिकार नै हुइतिस, पर ओकर शरीरमे ओकर थरवक हक बतिस; ओस्तेहेँके थरवाहे फेन ओकर अपन शरीरमे अधिकार नै हुइतिस, पर ओकर शरीरमे ओकर जन्नीक हक बतिस।