जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय; कि
“परमातिमा के नजर माहीं कोऊ निरदोस नहिं आय, एक जनेव नहिं आय!
अउर न कोऊ समझदारय आय, अउर न कोऊ परमातिमा काहीं ढूँढ़ँइन बाला आय,
सगले मनई परमातिमा के बताए गइल से भटकिगें हँय, अउर सगले मनई परमातिमा के नजर माहीं निकम्मा बनिगें हँय, कोऊ भलाई करँइ बाला नहिं आय, एक जनेव नहिं आय।”