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प्रकाशन 18:4
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
तेखअ शूणअ मंऐं स्वर्गा का एक होर बोल, “हे मेरै लोगो, तैहा नगरी का निखल़ा ओर्ही, ताकि तम्हैं तेसे पापा दी साझ़ू नां होए, अर तेसे खरी मांझ़ै तम्हां लै निं एछे।
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प्रकाशन 18:2
तेऊ बोलअ ज़ोरै-ज़ोरै इहअ, “ढूल़ी गअ, बडी बाबेल नगरी ढूल़ी, “तिंयां हुऐ हर भूता रहणें बसेरै, अर हरेक छ़ोतलै अर च़िल़्हखरै च़ेल्लू-पखीरूए कोल्ह।
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