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प्रकाशन 17:14
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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पशू अर इना दस राज़ै करनअ मिम्मूं संघै जुध पर मिम्मूंए हणीं तिन्नां का ज़ीत, किल्हैकि सह आसा प्रभूओ प्रभू, अर माहा राज़अ, अर ज़ुंण शादै दै आसा, अर छ़ांटै दै आसा, अर विश्वासी आसा, तिंयां बी ज़ितणैं।”
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प्रकाशन 17:1
ज़हा सात स्वर्ग दूता का तिंयां सात लोहदी थिई, तिन्नां मांझ़ै बोलअ एकी ज़ण्हैं मुंह सेटा एछी, “ओर्ही एछ, हुंह रहैऊं ताखा तैहा बडी कंज़री बेटल़ीए सज़ा, ज़ुंण खास्सै पाणीं दी आसा बेठी दी।
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प्रकाशन 17:8
“ज़हा पशू तूह एभै भाल़अ आसा लागअ द, अह रहा त पैहलै पर ऐबै निं रहणअ, अह निखल़णअ नथहऐ कूंडा का बागै अर परमेशरा करनअ अह ऐबै सदा लै खतम। तेखअ पृथूई दी रहणैं आल़ै ज़सरै नाअं संसारे मूल़ हणें बगती ज़िन्दगीए कताबा दी निं आथी लिखै दै, ज़ांऊं तिन्नां एऊ पशूए दशा भाल़णीं, तिंयां प्राछणैं। अह रहा त पैहलै अर एभै निं अह आथी पर अह एछणअ एकी बारी भिई।
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प्रकाशन 17:5
तेसे माथै त इहअ नाअं लिखअ द, “भेद, बडी बाबेल नगरी अर पृथूईए सारी कंज़री बेटल़ीए अर च़िल़्हखरी च़िज़े ईज।”
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