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भज़न 77:11-12
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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पर हे बिधाता, ज़ुंण महान काम तंऐं किऐ, तेता निं हुंह बिस्सरदअ, पराणैं ज़मानैं तंऐं ज़ुंण नुआहरै काम किऐ, तिंयां डाहणैं मुंह आद। आझ़ तैणीं तंऐं ज़िहअ बी किअ मुंह रहणअ तेते बारै सोठदै लागी, मुंह करनअ तेरै तिन्नां महान कामों धैन।
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भज़न 77:14
च़मत्कार सका सिधअ तूह परमेशर ई करी, तंऐं रहैऊअ देशा-देशा का आपणअ बल।
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भज़न 77:13
तूह बिधाता ज़िहअ बी करा, तेरअ सह काम हआ भलअ ई, तूह आसा सोभी का बडअ अर महान, तेरअ मकाबलअ निं देअ नां देबतै करी सकदै!
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भज़न 77:1-2
हे बिधाता, हुंह करा लेर-पकार पाई ताह सेटा अरज़, तै झ़ाणीं तूह शुणें! ज़ेभै मुंह आफ़त पल़ी, तेभै करा हुंह मेरै मालक बिधाता सेटा अरज़, सारी राची डाहा हुंह अरज़ करदी बारी आपणीं बाह फुआरी, पर मुंह निं शांती भेटी।
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