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भज़न 78:7
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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इहअ करै हणअ तिन्नां परमेशरा दी पाक्कअ भरोस्सअ, नां तिंयां परमेशर बिधाता किऐ दै महान कामां बिस्सर्नै। तेखअ ज़िऊंणीं तिन्नां तेऊ साबै ज़िन्दगी ज़िहअ तेऊ हुकम आसा किअ द।
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भज़न 78:4
हाम्हां निं ईंयां गल्ला आपणैं लान्हैं सुन्हैं का च़ोरी डाहणीं, हाम्हां खोज़णअ आगली पोस्ती का बिधातो बल अर तेऊए महान कामें बारै कि तेऊ किहै-किहै नुआहरै काम आसा किऐ दै।
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भज़न 78:6
ताकि हर पोस्तीए मणछा बधाने शिक्षा भेटे अर तिंयां तेऊ बधाना आगली पोस्ती का खोज़े।
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