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भज़न 67:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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हे बिधाता, हाम्हां लै दै जश अर बर्गत, हाम्हां बाखा भाल़ हास्सदी अर प्रैश्शै मुंहैं।
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भज़न 67:7
आजू बी भेटणीं हाम्हां बिधाता का बर्गत ई, संसारे सोभी लोगै लोल़ी बिधातो अदर किअ।
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भज़न 67:4
सोभी देशै लोल़ी तेरी ज़ै-ज़ैकारे भज़न बोलै, किल्हैकि तंऐं किअ सोभी लोगो नसाफ, अर सोभी देशा लै सलाह बी दैआ तूह ई।
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