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भज़न 66:18
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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ज़ै मेरी सोठ बृथा अर पाप करने हंदी, तै किल्है लाई ती मालकै मेरी अरज़ शूणीं।
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भज़न 66:20
मुंह करनी परमेशरे ज़ै-ज़ैकार, किल्हैकि तेऊ शूणीं मेरी अरज़, सह निं मुल्है झींण करनै का पिछ़ू हटअ।
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भज़न 66:3
परमेशरा लै बोला इहअ, “तेरै काम भाल़ किहै महान आसा! ताखा आसा महान बल अर तेरै दुशमण पल़णै तेरै च़रणैं।
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भज़न 66:1-2
संसारे मणछो, ज़ोरै-ज़ोरै करा परमेशरे ज़ै-ज़ैकार! तेऊए नाओंए गिहा बोला, तेऊए स्तोती अर ज़ै-ज़ैकार करा!
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भज़न 66:10
हे परमेशर, तंऐं ज़ाच़ै-परखै हाम्हैं राम्बल़ै करै, तंऐं परखै हाम्हैं तिहै ज़ेही आगी जैंदरी झमाऊंईं करै च़ंदी परखा।
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भज़न 66:16
परमेशरे डरा हेठै रहणैं आल़ै लोगो, हुंह खोज़ूं तम्हां का कि परमेशरै मुल्है किज़ै-किज़ै किअ।
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