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भज़न 64:10
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
ज़ुंण काम बिधाता किअ, तेता करै हणीं सोभी धर्मीं मणछा खुशी। तिन्नां भेटणीं तेऊ सेटा शरण, भलै मणछा करनी तेऊए ज़ै-ज़ैकार।
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भज़न 64:1
हे परमेशर, मुंह पल़ी बेघै खरी, मेरी अरज़ शुण! मुंह लागी मेरै दुशमणा का डअर, तूह बच़ाऊ ऐबै मेरी ज़िन्दगी!
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