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भज़न 58:11
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
तेखअ बोल़णअ लोगा इहअ, “धर्मीं मणछा भेटअ बधिया फल, अह आसा परमेशर ई ज़ुंण संसारै नसाफ करा।”
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भज़न 58:3
तम्हैं किअ हुऐ ज़ल्मां ओर्ही बूरअ अर झ़ुठअ ई झ़ुठअ!
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भज़न 58:1-2
तम्हैं राज़ करनै आल़ै शूरबीर मणछ कै कधू नसाफ बी करा? तम्हैं कधू धर्मीं रही शुचअ नसाफ बी किअ? तम्हैं निं करदै! तम्हैं सोठा सिधअ बूरअ ई ज़िहअ तम्हैं करा, तम्हैं करा देशै ज़ुल्म अर उपद्रभ ई।
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