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भज़न 59:16
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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पर मुंह करनी तेरै ज़ोरे ज़ै-ज़ैकार, तेरी अटल़ झ़ूरीए बोल़णीं मुंह दोत्ती धैल़ गिह। किल्हैकि तूह आसा मुल्है उछ़टै गहल़ा ज़िहअ ज़ेथ हुंह आफ़ते पलका शरण लआ।
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भज़न 59:17
मुंह करनी तेरी ज़ै-ज़ैकार, मेरी फाज़त करनै आल़अ आसा तूह, तूह आसा सह परमेशर ज़ुंण मुल्है खास्सअ झ़ूरा।
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भज़न 59:9-10
हे परमेशर, मुंह आसा तेरै ज़ोरो भरोस्सअ, मेरी शरण लणें ज़ैगा आसा तूह ई। तूह झ़ूरा मुल्है अर तूह जाणअ मुंह भेटी, ताह रहैऊंणै मुखा मेरै दुशमण हारदै मेरी आछी।
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भज़न 59:1
हे मेरै परमेशर, तूह बच़ाऊ मुंह मेरै दुशमणा का, हुंह गोटअ इनै फेरा-फेर ऐबै बच़ाऊ इना का मुंह तूह ई।
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