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भज़न 57:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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हे बिधाता, मुल्है कर झींण, किल्हैकि मंऐं आसा ताह सेटा शरण लई दी। ज़ेभै तैणीं ईंयां आफ़ता मुक्की निं जाए, तेभै तैणीं लणी मुंह तेरै फैंखा हेठै शरण।
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भज़न 57:10
हाम्हां लै तेरी अटल़ झ़ूरी आसा उझै सरगै तैणीं, तेरअ सत्त आसा सारै भ्रमंडै।
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भज़न 57:2
मुंह करनी ताह परम प्रधान परमेशरा सेटा अरज़ ज़ुंण मेरी सारी गरज़ा पूरी करा।
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भज़न 57:11
हे बिधाता, तेरअ अदर लोल़ी उझै सारै भ्रमंडै हुअ अर तेरअ प्रतप्प लोल़ी सारी पृथूई दी शुझुअ।
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