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भज़न 53:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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ऐडअ सोठा आपणैं मन्नैं इहअ, “परमेशर निं आथी ई!” इहै मणछ आसा भ्रष्ट गऐ दै हई, तिन्नें आसा बेघै च़िल़्हखरै काम अर तिन्नां मांझ़ै निं इहअ कोहै आथी ज़ुंण भलअ पाछा।
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भज़न 53:2
परमेशर हआ स्वर्गा का उंधै मणछा भाल़अ लागअ द कि तिन्नां मांझ़ै कहा एकी बी आसा अक्ल ज़ुंण परमेशरे लोल़-तोप करा।
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भज़न 53:3
पर सोभै मणछ आसा कबाता गऐ दै पेठी, ज़ाथी आसा सोभै भ्रष्ट गऐ दै हई। कोहै निं भलअ करदअ, ज़ाथी निं एक बी आथी!
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