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भज़न 52:8
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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पर हुंह आसा इहै जैतूने बूटा ज़िहअ, ज़ुंण परमेशरे भबने खोल़ै आसा लागअ द, हुंह करा तेऊए अटल़ झ़ूरी दी भरोस्सअ ज़ुंण मुंह संघै जुगै-जुगै तैणीं सदा रहणीं।
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भज़न 52:9
हे परमेशर, तेरै ई एऊ कामां लै रहणअ मुंह कबल्लै तेरअ शूकर करदै लागी, मुंह खोज़णअ तेरै सोभी पबित्र लोगा सेटा डेऊई कि तूह किहअ भलअ आसा।
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