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भज़न 51:10
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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हे परमेशर, मेरै मन्नैं पा तूह सुंबल़ी सोर अर मेरी आत्मां कर तूह ऐबै शुची अर भरोस्सै करनै जोगी।
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भज़न 51:12
मुंह लोल़ी भिई तेही खुशी हुई ज़ेही तेरै उद्धार करनै करै भेटा, अर मेरै दिलै कर एही च़ाह पैईदा कि ज़िहअ तूह बोले मंऐं लोल़ी तिहअ ई किअ।
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भज़न 51:11
मुंह निं तूह आप्पू का दूर करी अर नां आपणीं पबित्र आत्मां मुखा पोर्ही काढी।
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भज़न 51:17
हे परमेशर, तूह हआ तेता लै खुश कि दिला का गलती मनी पछ़ताअ करे, अह ई आसा सह बल़ीदान ज़ेता तूह मना अर ज़ेता करै तूह राज्ज़ी हआ।
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भज़न 51:1-2
हे बिधाता, मुल्है दै जश, किल्हैकि तूह झ़ूरा मुल्है सदा। आपणीं महान झींण करी कर तूह मेरै पाप दूर। मेरी बूराई कर पठी खतम अर तूह कर मुंह मेरै पापा का शुचअ।
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भज़न 51:7
तूह कर मेरै पाप दूर, तै जाणअ हुंह शुचअ हई, मुंह धो तूह ज़ुफे डाल़ी करै आप्पै तै हणअ हुंह हिंऊंआं ज़िहअ शेतअ।
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भज़न 51:4
सह आसा सिधअ तूह ई, एक्कै तूह ई ज़सरै खलाफ मंऐं पाप किऐ, ज़ेता तूह बूरअ मना मंऐं किअ सह ई! मंऐं निं तेरअ हुकम मनअ अर सह आसा मेरी गलती, मुल्है दोश लाणा लै आसा तूह शुचअ अर मेरअ नसाफ करना लै आसा तूह धर्मीं।
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