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भज़न 50:14-15
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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हुंह आसा परम प्रधान परमेशर, हुंह च़ाहा तम्हां का इहअ बल़ीदान कि तम्हैं सदा मेरअ शूकर करे, अर मुल्है आपणीं ज़बान पूरी करे ज़ुंण तम्हैं मानत मनी। खरीए पलका बोलै तम्हैं मुल्है, हुंह बच़ाऊं तम्हां आप्पै अर तै भेटणीं तम्हां मेरी ज़ै-ज़ैकार करनी।”
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भज़न 50:10-11
किल्हैकि बणें सोभै पशू अर हज़ारो धारा रहणैं आल़ै ज़ीब बी आसा सोभै मेरै ई। सोभै च़ेल्लू-पखीरू बी आसा मेरै अर संसारे सोभै ज़िऊंदै ज़ीब बी आसा मेरै ई।
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