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भज़न 40:1-2
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हुंह डाहा सबर, संघा रहा ताह बिधाता न्हैल़अ लागी, तूह हेरा मेरी लेर-पकार शूणीं। तंऐं काढअ हुंह डुघी खाल़्ही अर बरैबाद करनै आल़ी च़िक्करै जैंदरा का उझै, तंऐं किअ हुंह सरली ज़ैगा खल़अ संघा डाहअ हुंह राज्ज़ी-राम्बल़अ।
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भज़न 40:3
तंऐं दैनी मुल्है एक नऊंईं गिह, ज़ेता बोली हुंह तेरी ज़ै-ज़ैकार करी सके। एता भाल़ी करनअ खास्सै मणछा तेरअ अदर, संघा डाहणअ तिन्नां बी ताह बिधाता दी आपणअ भरोस्सअ।
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भज़न 40:4
तूह दैआ तिन्नां लै बर्गत, ज़ुंण ताह दी भरोस्सअ डाहा, ज़ुंण मुहुर्ती निं पूज़दै अर ज़ुंण घमंड निं करदै।
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भज़न 40:8
मेरी खुशी आसा सह ई कि मुंह करनअ तिहअ ई ज़िहअ तूह च़ाहा, मंऐं आसा तेरअ बधान आपणैं दिलै डाहअ द।”
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भज़न 40:11
हे बिधाता, तूह निं मुल्है झींण करनी छ़ाडी, तेरी अटल़ झ़ूरी अर सत्ता करै लोल़ी हुंह राज्ज़ी-राम्बल़अ रहअ।
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