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भज़न 39:7
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हे मेरै मालक, तै हुंह किज़ै न्हैल़ूं? आशा डाहा हुंह तेरी।
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भज़न 39:4
“हे बिधाता, ज़ीबाण, तूह डाह मुखा खोज़ी कि हुंह कधू तैणीं ज़िऊंणअ? ऐबै मेरी आजू केतरी अमर रही? मेरी मौत केभै हणीं?”
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