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भज़न 36:9
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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ज़िन्दगी दैणैं आल़ी सोबल़ आसा ताखा ई, अर तेरै धुप्पै करै हआ हाम्हां सोभी लै प्रैश्शअ।
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भज़न 36:7
तेरअ हाम्हां मणछा लै झ़ूरनअ आसा किम्मती खज़ानै ज़िहअ! हाम्हैं लआ तेरै फैंखा हेठै शरण।
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भज़न 36:5
हे बिधाता, तेरी झ़ूरी आसा पृथूई उझै स्वर्गै तैणीं, तेरअ सत्त आसा सरगा का बी उझै तैणीं।
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भज़न 36:6
परमेशर, तेरअ धर्म आसा बडै पर्बता ज़िहअ, तेरअ नसाफ आसा डुघै समुंदरा ज़िहअ। मणछ अर सोभी ज़ीबे फाज़त करा तूह बिधाता ई।
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