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भज़न 37:4
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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तम्हैं करै तिहअ ज़िहअ बिधाता च़ाहा, तै करनी तेऊ थारी दिला-मन्नें पूरी।
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भज़न 37:5
सोभै गल्ला दैआ बिधाते हाथै छ़ाडी, बिधाता दी डाहा भरोस्सअ, तेऊ हेरनी सोभै गल्ला पूरी करी।
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भज़न 37:7
सबर डाहणअ संघा दैणअ बिधाता काम करनै, कदुष्ट मणछा सफल हंदै भाल़ी निं फिकर करनअ अर नां तिन्नें कदुष्ट बिक्री भाल़ी हैल़अ करी।
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भज़न 37:3
बिधाता दी डाहणअ भरोस्सअ, आप्पू रहणअ भलअ करदै लागी। तै रहणैं तम्हैं तेऊ देशै बस्सी अर राज्ज़ी-राम्बल़ै।
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भज़न 37:23-24
धर्मीं मणछा नढैऊआ बिधाता आप्पै, सह हआ तिन्नें ज़िन्दगीए हर गल्ला करै खुश। च़ाऐ तिन्नां ठोहल़ बी लागे, तिंयां निं धरनीं बधल़णैं, किल्हैकि तिन्नों हाथ हआ बिधाता डाहअ द ढाकी।
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भज़न 37:6
तेऊ करनअ थारअ धर्म प्रैश्शै ज़िहअ अर थारअ नसाफ करनअ तेऊ दपहरे धुप्पै ज़िहअ।
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भज़न 37:8
नां रोश्श करी अर नां बखर्दै लागी, ज़ै रोश्श काबू निं हुअ, तेता करै हआ आफ़त खल़ी।
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भज़न 37:25
हुंह हुअ ऐबै प्रोढअ अर मंऐं ज़िऊई खास्सी अमर, पर मंऐं निं इहअ कधि भाल़अ कि धर्मीं मणछ डाहै बिधाता कल्ही शोटी, नां इहअ भाल़अ कि तिन्नें लान्हैं लागै किधी टुकरी मांगी करै खांदै!
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भज़न 37:1
बूरै कर्म करनै आल़ै मणछ निं पाल्लै पाणै हंदै, नां कदुष्ट मणछा संघै ज़ीद डाहणीं।
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