1
भज़न 32:8
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हे बिधाता, तूह बोला मुल्है इहअ, “हुंह खोज़ूं ताखा तैहा बाता ज़ेथ ताह हांढणअ लागा, हुंह रहूं ताल्है सलाह दैंदअ अर ताह भाल़अ लागी।
Compare
Explore भज़न 32:8
2
भज़न 32:7
मेरै लुक्की रहणें ज़ैगा आसा तूह ई, ताह डाहणअ हुंह आफ़ता का बच़ाऊई। ज़ुंण ज़ीत तंऐं मुल्है दैनी, मुंह बोल़णीं तेते ज़ोरै-ज़ोरै गिहा।
Explore भज़न 32:7
3
भज़न 32:5
खिरी मनअ मंऐं ताह सेटा कि मंऐं किऐ पाप, मंऐं निं ताह सेटा किछ़ै गलती च़ोरी डाही। मंऐं सोठअ इहअ कि मुंह मनणी ताह सेटा सोभै गलती, तंऐं किऐ तेखअ मेरै सारै पाप माफ।
Explore भज़न 32:5
4
भज़न 32:1
तिन्नां लै भाल़ केही बर्गत हुई, ज़सरै पाप बिधाता माफ किऐ अर दोश दूर किऐ।
Explore भज़न 32:1
5
भज़न 32:2
तिन्नां मणछा लै आसा बर्गत ज़हा लै बिधाता पाप करनैओ दोश निं काढअ अर ज़सरै दिलै किछ़ै कपट निं आथी।
Explore भज़न 32:2
6
भज़न 32:6
तैही लागा तेरै सोभी लोगा बगत रहंदी ताह सेटा अरज़ करनी, ताकि ज़ेभै आफ़तो बडअ दरैअ एछे, तेभै निं सह तिन्नां सेटा पुजणअ कि तिन्नां घर्होहल़ी सके।
Explore भज़न 32:6