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भज़न 31:24
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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ओ लोगो, ज़ुंण बिधाता दी आशा डाहा, तम्हैं डाहा हैअ अर तम्हैं लोल़ी पाक्कै रहै।
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भज़न 31:15
मेरी ज़िन्दगी आसा तेरै हाथै, तूह बच़ाऊ मुंह मेरै दुशमणा का ज़ुंणी हुंह हंती-हंती आणअ मारी।
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भज़न 31:19
भली च़िज़ा भाल़ केही बधिया हआ, तेता डाहा तूह तिन्नां लै ज़ुंण तेरअ अदर करा! एतो थोघ लागा सोभी मणछा का कि तूह किहअ भलअ आसा अर ज़ुंण ताह दी भरोस्सअ डाहा, तिन्नें तूह केही राम्बल़ै करै करा फाज़त।
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भज़न 31:14
पर हे बिधाता, मेरअ भरोस्सअ आसा ताह दी, हुंह बोला इहअ, “मेरअ परमेशर आसा तूह ई।”
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भज़न 31:3
हे बिधाता, मेरी शरण लणें बडी टोल्ह अर बच़णा लै गहल़ आसा तूह ई। तूह खोज़ मुखा आजूए बात अर तूह नढैऊ मुंह तिहअ ई ज़िहअ तंऐं बोलअ द आसा।
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भज़न 31:5
मंऐं छ़ाडी आपणीं ज़िन्दगी तेरै आसरै। हे परमेशर बिधाता, हुंह डाहा तेरअ ई भरोस्सअ किल्हैकि हुंह आसा तंऐं बच़ाऊअ द।
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भज़न 31:23
ए बिधाते लोगो, तम्हैं झ़ूरा बिधाता लै! ज़ुंण शुचअ-पाक्कअ रहा, तेऊए फाज़त करा बिधाता। पर घमंडी लै दैआ सह पाक्कै दी सज़ा।
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भज़न 31:1
हे बिधाता, हुंह लआ ताह सेटा शरण, मुंह निं लोल़ी शर्मिंदै पल़अ हणअ। तूह आसा धर्मीं परमेशर, हुंह करा ताखा एही अरज़ कि मुंह बच़ाऊ।
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