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भज़न 18:2
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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तूह परमेशर बिधाता आसा मुल्है बडी टोल्हा अर मुंह फेर उछ़टै गहल़ा ज़िहअ ज़ेथ पिछ़ू शरण लई हुंह बच़ी रहा। तूह बच़ाऊआ मुंह ढाल़ा ज़िहअ, मेरी फाज़त करा तूह ई अर तूह डाहा मुंह राज्ज़ी-राम्बल़ै बच़ाऊई।
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भज़न 18:30
हे परमेशर बिधाता, तेरी बात आसा शुची-पाक्की, तेरै बैणा दी आसा सत्त। ज़ुंण ताह सेटा शरण लआ, तूह करा तिन्नें फाज़त।
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भज़न 18:3
मुंह करनी ताह बिधाता सेटा अरज़, तंऐं बच़ाऊअ हुंह मेरै दुशमणा का, ज़ै-ज़ैकार करनै जोगी आसा तूह ई।
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भज़न 18:6
हुंह त आफ़ता दी पल़अ द, मंऐं पाई ताह बिधाता सेटा पकार कि मेरी मज़त कर। मेरी पकार पुजी तेरै बसेरै तेरै कानै अर ज़ांऊं तंऐं अरज़ शूणीं हेरी।
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भज़न 18:28
हे बिधाता, मुल्है किअ प्रैश्शअ तंऐं ई, तंऐं किअ मेरअ न्हैरअ मुखा दूर।
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भज़न 18:32
मुल्है बल दैणैं आल़अ आसा तूह परमेशर ई अर मुखा राम्बल़ी बात खोज़णैं आल़अ बी आसा तूह ई।
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भज़न 18:46
हे बिधाता, तूह आसा ज़िऊंदअ परमेशर! मुंह करनी तेरी ज़ै-ज़ैकार! मुंह बच़ाऊंणै आल़अ आसा तूह अर मुंह करनी तेरी सारै दी बड़ैई।
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