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भज़न 17:8
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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मुंह डाह आपणीं आछी ज़िहअ बच़ाऊई अर मुंह डाह आपणैं फैंखा हेठै बुदरी।
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भज़न 17:15
हे बिधाता, हुंह आसा नर्दोश अर हुंह सका तेरअ मुंह भाल़ी! सुत्ती उझ़ुई च़ाहा हुंह ताह तिहअ ई भाल़णअ ज़िहअ तूह आसा।
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भज़न 17:6-7
हे परमेशर, हुंह करा ताह सेटा अरज़ किल्हैकि ताखा जाआ मुंह तेतो ज़बाब भेटी, ऐबै फिर मुंह बाखा संघा शुण मेरी अरज़। आपणीं महान झ़ूरी कर मुल्है प्रगट, तेरै महान बला करै आसा हुंह मेरै दुशमणा का आझ़ तैणीं राज्ज़ी-राम्बल़अ रहअ द।
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