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भज़न 16:11
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
तंऐं रहैऊई मुखा सह बात ज़ुंण ज़िन्दगी बाखा डेओआ, ताह नेल़ रहणैंओ धैस्स करा मुंह खुश अर ताह संघै रही एछा मुंह सदा लै नंद।
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भज़न 16:8
मुंह रहा इहअ धैस्स लागी कि तूह बिधाता आसा हर बगत मुंह संघै, मुंह निं कोहै डरैऊई सकदअ किल्हैकि तूह आसा मुंह सेटा आप्पै।
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भज़न 16:5
हे बिधाता, मेरी ज़ैदात आसा तूह अर तूह दैआ मुल्है ज़ेही मुंह गरज़ पल़ी तेही, आजू बी आसा मेरी ज़िन्दगी तेरै ई हाथै।
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भज़न 16:7
हे बिधाता, मुंह करनी तेरी ज़ै-ज़ैकार किल्हैकि मुल्है भली सलाह दैआ तूह ई, राची बी रहा हुंह सोठदअ लागी कि मुंह किहअ लागा करनअ।
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भज़न 16:6
ज़ुंण ज़ैगा तंऐं मुल्है बांडी दैनी, तिधी आसा मेरी मौज़ अर आजू बी हणअ मेरै मज़अ ई।
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भज़न 16:1
हे परमेशर, मेरी फाज़त कर तूह ई मंऐं आसा ताह सेटा शरण लई दी।
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