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भज़न 147:3
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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बिधाता करा दुखी दिला आल़ै नरोगै, सह करा तिन्नें देहीए ज़खमा दी मल्हम लाई नरोगै।
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भज़न 147:11
पर बिधाता रहा तिन्नां लै राज्ज़ी ज़ुंण तेऊओ अदर करा अर तेऊए अटल़ झ़ूरी दी भरोस्सअ डाहा।
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भज़न 147:5
म्हारअ बिधाता आसा महान अर तेऊ का आसा सारअ बल, तेऊए महान समझ़ निं कुंण नापी सकदअ।
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भज़न 147:4
तेऊ आसा सरगे तारै बी गणी करै डाहै दै, तेऊ आसा तिन्नां सोभिओ ज़ुदअ-ज़ुदअ नाअं डाहअ द।
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भज़न 147:6
सह दैआ भोल़ै मणछा लै आसरअ, पर कदुष्ट मणछा झेचा सह धरनीं।
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