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भज़न 146:5
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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तिन्नां मणछा लै भाल़ केही बर्गत हणीं ज़सरी मज़त याकबो परमेशर करा अर ज़ुंण परमेशर बिधाते आसरै रहा।
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भज़न 146:3
बलबान मणछे आसरै निं रहणअ, मणछा मांझ़ै निं कोहै तम्हां बच़ाऊई सकदअ।
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भज़न 146:7-8
सह करा हारै-मारै दै मणछो नसाफ अर भुखै रज़ैऊआ सह रोटी दैई। ज़ुंण कैद आसा किऐ दै, बिधाता करा तिन्नां आज़ाद, सह दैआ कांणै लै आछी कि तिन्नां का शुझिए। ज़ुंण ठोहल़ लागी धरनीं पल़ै तिन्नां करा सह हाथा ढाकी आज़रै खल़ै, सह झ़ूरा धर्मीं मणछा लै।
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भज़न 146:6
स्वर्ग, पृथूई, समुंदर अर तेते सोभी गल्ला बणाणैं आल़अ आसा सह ई परमेशर। सह ज़ुंण ज़बाब दैआ, सह हआ अटल़।
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भज़न 146:9
सह करा थारै देशै रहणैं आल़ै पाखलै मणछे बी फाज़त, बिधबा अर छ़ुटै-मुक्कै दै लान्हें करा सह आप्पै मज़त, पर कदुष्ट मणछा करा सह पठी बरैबाद।
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