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भज़न 145:18
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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ज़ुंण शुचै दिलै ताह सेटा अरज़ करा, तूह रहा आप्पू तिन्नां नेल़।
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भज़न 145:8
तूह बिधाता आसा झ़ूरनै आल़अ अर झणैल़ू, ताह निं धखी का रोश्शै एछदी अर तूह करा खास्सी झींण।
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भज़न 145:9
तूह आसा सोभी लै भलअ अर तेरी झींण आसा पृथूईए सोभी ज़ीबा लै।
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भज़न 145:3
तूह बिधाता आसा महान अर तूह ई आसा बड़ैई करनै जोगी। ज़ेतरअ हाम्हैं सोठी सका, तूह आसा तेता का बी खास्सअ महान।
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भज़न 145:13
तेरअ बधान आसा अटल़ अर तूह आसा सदा लै राज़अ। तूह निं आपणीं ज़बानी का कधि हुधदअ, ज़िहअ तूह बोला, तूह करा तिहअ ई।
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