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भज़न 130:5
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हुंह रहअ ताह न्हैल़अ भाल़अ लागी कि ताह हेरनी मेरी मज़त करी, अर हुंह रहा तेते आसरै ज़ुंण तंऐं ज़बान आसा दैनी दी।
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भज़न 130:4
पर तूह छ़ाडा हाम्हां लै माफी, ताकि हाम्हैं तेरी डरा हेठै रहणअ शिखल़े।
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भज़न 130:6
ज़िहै पहरी न्हैल़ै-भाल़ै रहा लागी कि राच केभै च़ाल्ली भैई, तिहअ रहा हुंह बी ताह मालका न्हैल़अ लागी, हुंह रहा तिन्नां पहरी का बी खास्सअ ताह मेरै मालक बिधाता न्हैल़अ चतैन।
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भज़न 130:2
हे मेरै मालक, ज़ीबाण, मुंह बाखा दै धैन, तूह शुण मेरी लेर-पकार कि हुंह मांगा ताखा मज़त।
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भज़न 130:1
हे बिधाता, खास्सै डुघै दी पल़ी पाआ हुंह खरीए पलका ताह सेटा पकार।
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