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भज़न 129:4
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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पर बिधाता आसा धर्मीं, तेऊ किऐ हाम्हैं कदुष्ट मणछे गलामी का आज़ाद।
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भज़न 129:2
“होछ़ी अमरा ओर्ही आणै हाम्हैं दुशमणै फेरा-फेर गोटी हंती-हंती मारी, पर तिंयां निं हाम्हां हारी सकै।
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