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भज़न 13:5
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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मुंह आसा भरोस्सअ कि तूह झ़ूरा मुल्है, मुंह हणअ खुश किल्हैकि तंऐं हेरअ हुंह बच़ाऊई।
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भज़न 13:6
हे बिधाता, मुंह बोल़णीं तेरी गिहा, किल्हैकि तूह आसा मुल्है खास्सअ भलअ।
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भज़न 13:1
हे बिधाता, ताह केभै तैणीं डाहणअ हुंह बिस्सरी? सदा लै? ताह केभै तैणीं डाहणीं मुंह बाखा पिठ फरेऊई?
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भज़न 13:2
केभै तैणीं रहूं हुंह खरी काटदअ लागी? केभै तैणीं रहणअ मुंह धैल़-राच दुख पल़ी? केभै तैणीं रहणैं मेरै दुशमण मुंह च़िक्कदै लागी?
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