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भज़न 12:6
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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हे बिधाता, तेरी ज़बान हआ पाक्की, सह हआ च़ोखी च़ंदी ज़ेही ज़ेथ आरनैं साता बारी हआ पाण दैनी दी।
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भज़न 12:7-8
हे बिधाता, हाम्हां का आसा थोघ तूह करा हारी-मारी आणै दै मणछे फाज़त, तिन्नां डाहा तूह सदा लै एऊ ज़मानें लोगा का बच़ाऊई। च़ाऐ कदुष्ट मणछ ज़ेतरै बी कल़ेल़ै किल्है निं फिरे अर सारै देशै बूराईए ज़ै-ज़ैकार किल्है निं होए हंदी लागी दी।
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भज़न 12:5
पर हे बिधाता, तूह बोल तिन्नां लै इहअ, “गरीब मणछ आणै हंती-हंती मारी अर छ़ुटै-मुक्कै दै लान्हैं लागै लेरदै, मुंह करनी तिन्नें फाज़त ताकि तिंयां राज्ज़ी-मौज़ी रहे।”
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