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भज़न 121:1-2
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हुंह भाल़ा उझै उछ़टी धारा बाखा लै, मुल्है मज़त किधा का एछणी? मेरी मज़त करा सह बिधाता आप्पै ज़ुंणी सारअ भ्रमंड आसा बणाअं द।
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भज़न 121:7-8
बिधाता काढणअ तूह आफ़ता का बच़ाऊई, तेऊ बच़ाऊंणअ तूह मरनै का। बिधाता करनी आझ़ा पोर्ही सारी सदा, एछदी-नांहंदी तेरी फाज़त।
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भज़न 121:3
सह बिधाता निं ताल्है ठोहल़ लागणै दैंदअ, ज़ुंण तेरी फाज़त करा, तेऊ निं निंजो झ़लारअ एछदअ।
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