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भज़न 120:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
खरीए पलका पाई मंऐं बिधाता सेटा पकार, तेऊ शूणीं मेरी अरज़।
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भज़न 120:2
हे बिधाता, तूह डाह मुंह शल़ैघा घल़णै आल़ै अर छ़ल़-कपट करनै आल़ै मणछा का बच़ाऊई।
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