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भज़न 103:2
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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ए मेरै मन्नां, बिधातो शूकर कर! ऐहा गल्ला निं बिस्सरी आथी कि सह किहअ झणैल़ू आसा।
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भज़न 103:3-5
तेऊ ई, मेरै सारै पाप माफ किऐ, अर तेऊ किअ हुंह सोभी बमारी का नरोगअ। बिधाता बच़ाऊअ हुंह मरनै का, तेऊए झींण अर झ़ूरी रहा मुल्है मेरै मुंडै मुगटा ज़ेही। सह करा धैल़ मुल्है ज़िऊंणां लै मेरी गरज़ पूरी, ताकि मुंह मुक्षरलै ज़िहै भिई तराण एछे।
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भज़न 103:1
ए मेरै मन्नां, बिधातो शूकर कर! मुंह करनी तत्त-दिला का बिधाते पबित्र नाओंए ज़ै-ज़ैकार।
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भज़न 103:13
ज़िहअ बाब आपणैं शोहरू लै झणैल़ू हअ, तिहअ झणैल़ू आसा बिधाता तिन्नां लै ज़ुंण तेऊओ अदर करा।
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भज़न 103:12
ज़िहअ दूर पुर्बा का पछ़म आसा, तिहै दूर किऐ हाम्हां का तेऊ म्हारै पाप।
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भज़न 103:8
बिधाता आसा झ़ूरनै आल़अ अर झणैल़ू, तेऊ निं धखी का रोश्शै एछदी अर तेऊए झ़ूरी आसा अटल़।
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भज़न 103:10-11
तेऊ निं हाम्हां संघै म्हारै पाप-दोशे साबै बभार किअ अर नां तेऊ हाम्हां लै तेते सज़ा दैनी ज़ुंण हाम्हां ज़रूर भेटणीं ती। ज़िहअ सरग पृथूई प्रैंदै उछ़टअ आसा, तिहअ झ़ूरा सह तिन्नां लै ज़ुंण तेऊओ अदर करा।
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भज़न 103:19
बिधाते राज़गाद्दी आसा स्वर्गै अर सह आसा सोभी प्रैंदै राज़अ।
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