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जेरमयाह 8:22
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
गलाद मुल्खै किज़ै इहअ मल्हम ई निं आथी ज़ुंण नरोगै करी सका? तेथ कुंण बैईद ई निं आथी? ज़ै आसा, तै मेरै ईंयां लोग नरोगै किल्है निं हुऐ?
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जेरमयाह 8:4
बिधाता बोलअ मुल्है इहअ, “जेरमयाह लोगा का खोज़ इहअ, ‘ज़ेभै लोग धरनीं बधल़िआ, तिंयां कै भिई खल़ै उझ़दै निं? ज़ै मणछ कबाता पेठा, तिंयां कै बापस फिरदै निं?
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जेरमयाह 8:7
सारस पंछ़ी का बी हआ थोघ कि केभै लागा बापस फिरनअ, कबूतर, घुघती अर बगूल्लै का बी फिरा बगती बापस। पर मेरी परज़ा का निं थोघ ई आथी! तम्हैं निं ज़ाणदै ई आथी कि हुंह बिधाता किज़ै च़ाहा।
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जेरमयाह 8:6
हुंह लागअ धैना करै शूणअ, पर तम्हैं निं राम्बल़ी गल्ला ई करदै। तम्हां मांझ़ै निं एकी बी आपणैं कदुष्ट कामां पिछ़ू माल़ी च़ेती! नां तम्हां मांझ़ै कुंणी एकी ज़ण्हैं बी इहअ बोलअ, “अह मंऐं किज़ै किअ?” तम्हैं आसा सोभ जुधा लै ठुर्हदै घोल़ै ज़िहै आपणीं-आपणीं बाता लागै दै हांढदै।
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जेरमयाह 8:9
तिंयां ज़ुंण आप्पू अक्ली आल़ै समझ़ा, तिन्नां पल़णअ शर्मिंदै हणअ। तम्हैं आसा झाखुऐ दै अर ज़ज़ाल़ा दी गऐ दै शाची। ज़ुंण मंऐं बिधाता बोलअ, सह समझ़अ तम्हैं बृथा, ऐबै किज़ूए अक्ल रही तम्हां का?
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