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ईशायाह 66:2
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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सारअ भ्रमंड आसा मंऐं बिधाता आपणैं हाथै बणाअं द! ईंयां सोभै च़िज़ा आसा मेरी ई! हुंह हआ तिन्नां मणछा का खुश ज़ुंण घमंड निं करदै, ज़ुंण बूरी गल्ले माल़ी च़ेता अर ज़ुंण मेरी डरा हेठै रही ज़िहअ हुंह बोला तिहअ ई करा।
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ईशायाह 66:1
बिधाता बोला इहअ, “स्वर्ग आसा मेरी राज़गाद्दी, पृथूई आसा मेरै पैरा हेठे च़ौकी। तम्हैं मुल्है किहअ घअर सका बणाईं? सह कुंण ज़ैगा हणीं ज़िधी हुंह बस्सणअ?
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ईशायाह 66:13
ज़ेही माआ आपणैं शोहरू रबाल़ा, तिहै रबाल़णै मुंह तम्हैं। तम्हां भेटणीं एरुशलेम नगरी शांती।
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ईशायाह 66:22
“मुंह बिधाता बणाणअं नऊंअ सरग अर नऊंईं पृथूई अर तिंयां रहणैं सदा। तिहै ई रहणैं थारअ नाअं अर तम्हां बाद थारी आद-लुआद सदा।
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