तेखअ मनी याकबै एही मानत, “ज़ै मालक ऐहा बाता मुंह संघा रही मेरी फाज़त करे अर पेटा लै रोटी अर घेरी लै झिकल़ै दैए, घअरा लै फरेओए तेखअ ज़ै हुंह राज्ज़ी-राम्बल़अ आपणैं घअरै बापस पुजे तै हणअ तूह मेरअ सदा लै बिधाता।
“तेखअ ज़ुंण मंऐं अह पात्थर खल़अ किअ, अह हणअ परमेशर बिधातो घअर, ज़ुंण बी तूह मुल्है दैए तेतो दसुअ निसब करनअ मुंह ताल्है ज़रूर दैई।”