परमेशर ताखे सर्गो ते पाल़ा,
ओर जमीना री खरिया ते खरी फसल,
ओर बऊत सारा नज्ज ओर नया शराब देओ;
दुनिया रे प्रदेशो रे लोक तेरे अधीन ओ
ओर हर जातिया रे लोक तांगे माथा टेको;
तूँ आपणे पाईया रा मालक ओ
ओर तेरी आम्मा रे पाऊ तांगे माथा टेको।
जो ताखे स्राप देओ, से आपू ई स्रापित ओ,
ओर जो ताखे आशीर्वाद देओ, से आशीष पाओ।”