तकरबाद हम आँखि ऊपर उठौलहुँ, तँ हमरा सामने मे एक विशाल भीड़ देखाइ पड़ल, जकर गिनती केओ नहि कऽ सकैत छल। ओहि भीड़ मे प्रत्येक जाति, प्रत्येक कुल, प्रत्येक राष्ट्र आ प्रत्येक भाषाक लोक छल। ओ सभ उज्जर वस्त्र पहिरने छल आ हाथ मे खजूरक छज्जा लेने सिंहासन आ बलि-भेँड़ाक सम्मुख ठाढ़ छल।