ओ सभ जोर सँ आवाज देलनि जे, “हे स्वामी, अहाँ जे पवित्र आ सत्य छी, अहाँ कहिया तक पृथ्वीक निवासी सभक न्याय कऽ कऽ हमरा सभक खूनक बदला नहि लेब?” हुनका सभ मे प्रत्येक केँ उज्जर वस्त्र देल गेलनि आ कहल गेलनि जे, “किछु समय तक आओर विश्राम करह, जाबत धरि तोरा सभक ओहि संगी-सेवक आ भाय सभक संख्या नहि पुरि जाइत छह, जे सभ तोरे सभ जकाँ मारल जायत।”