एहि लेल, मोन राखू जे ककरो ई अधिकार नहि अछि जे ओ अहाँ सभ पर एहि विषय मे दोष लगाबय जे, केहन वस्तु खाइत-पिबैत छी, अथवा पाबनि-तिहार, अमावस्या वा विश्राम-दिन किएक नहि मनबैत छी, किएक तँ ई सभ ताहि बात सभक छाया मात्र अछि, जे बाद मे आबऽ वला छल। वास्तविकता मसीहे छथि।