सच्ची आत्मिकता Halimbawa

अपनी सही पहिचान को पहिचानने की शुरूआत
आप कौन हैं? यह एक जटिल प्रश्न है, है कि नहीं? एक तरफ तो आपकी अपनी पहिचान आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, आपके व्यक्तित्व, आपकी वैचारिक शैली, और आपके जीवन में पाये जाने वाले मुख्य लोगों से जुड़ी हुई है।
और दूसरी ओर, आप वह नहीं जो आप सोचते हैं कि आप हैं।
परमेश्वर आपकी सच्ची पहिचान का रचयिता है। वह जानता है कि उसने आपको किस तरह तैयार किया है। वह जानता है कि जिस उद्देश्य के लिए उसने आपको बुलाया है उसे पूरा करने के लिए उसने आपको कौन सा वरदान दिया है।
इसीलिए पौलुस रोमियों से आग्रह करता है कि वह अपने बारे में उचित रीति से सोच विचार करेंः
क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिणाम के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। (रोमियों 12:3)
जब आप अपने बारे में परमेश्वर के दृष्टिकोण को समझ जाते हैं- अर्थात आप वास्तव में कौन हैं- तो सारी चीज़ें बदलने लगती हैं, और तब सच्ची आत्मिकता के साथ जीवन व्यतीत करना सम्भव हो जाता है।
जब परमेश्वर आपके मन को बदलते हैं, तो तब वह सांसारिक नियम जिनके अनुसार आप अपना जीवन व्यतीत करते थे बदलने लगते हैं। इसका अर्थ हैं कि अपने आप को अयोग्य समझने या घमण्ड की भावनाएं, जिस तरह से आप दूसरों के साथ व्यवहार करते हैं, आपका वैचारिक जीवन, आपके स्वपन और आपके लक्ष्य, वे सब भी बदल जाते हैं।
यह खास तौर पर यह दर्शाता है कि आप मसीह की देह में किस तरह से उपयुक्त ठहरेगें, जैसा कि पौलुस इस बाइबल खण्ड में संकेत करता है।
सच्ची आत्मिकता का अर्थ मसीह की देह अर्थात कलीसिया के एक अंग के रूप में जीवन व्यतीत करना है। यदि आप जानते हैं कि आप कौन हैं, तब आप प्रेम का उस तरीके से आदान प्रदान कर सकते हैं जैसा कि परमेश्वर ने तैयार किया है। आप जान जाते हैं कि विश्वासियों की मण्डली में आपका क्या स्थान है और आप प्रभावशाली ढंग से अपने वरदान का इस्तेमाल करते हैं। और आप अपनी बुलाहट को एक रूपान्तरित व जीवित बलिदान के रूप में इस्तेमाल करते हो जो परमेश्वर की योजना में बिल्कुल उपयुक्त साबित होती है।
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एक सच्चे मसीही का जीवन कैसा होता है?रोमियों 12, बाइबल का यह खण्ड, हमें एक तस्वीर प्रदान करता है। इस पठन योजना में आप, सच्ची आत्मिकता के अन्तर्गत पढ़ेंगे कि परमेश्वर हमारे जीवन के हर एक हिस्से को बदलते हैं- अर्थात हमारे विचारों, नज़रिये, दूसरों के साथ हमारे रिश्ते, बुराई के साथ हमारी लड़ाई को। परमेश्वर की उत्तम बातों को ग्रहण करके आज ही गहराई से संसार को प्रभावित करें।
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