बच्चों के लिए बाइबिलSample

नोह एक ऐसा व्यक्ति था जो परमेश्वर की पूजा करता था। सबके-सब परमेश्वर से घृणा और उनकी अवज्ञा करते थे। एक दिन परमेश्वर ने कुछ आश्चर्यजनक कहा। “मैं कमजोर दुनिया को उजाड़ दूँगा।” परमेश्वर ने नोह से कहा “केवल तुम्हारा परिवार ही बचाया जा सकेगा।”
परमेश्वर ने नोह को चेतावनी दी कि बहुत ही भयंकर बाढ़ आएगी और पूरे पृथ्वी पर छा जाएगी। “तुम अपने परिवार तथा पशुओं के लिए लकड़ी का एक सन्दूक और एक बड़ा-सा नाव बनाओ।” नोह को आदेश दिया जा चुका था। परमेश्वर ने नोह को खास निर्देश दिया। नोह व्यस्त हो गया।
वह सन्दूक क्यों बना रहा है, जब नोह ऐसा कहता तो लोग प्रायः उसका उपहास करते। नोह ने निर्माण जारी रखा। वह लोगों को परमेश्वर के संबंध में कहना भी जारी रखा। उसकी कोई नहीं सुनता था।
नोह को अटूट विश्वास था। वह परमेश्वर पर विश्वास करता था, यहाँ तक की इससे पहले कभी भी वर्षा भी नहीं हुई थी। सन्दूक सामान लादने के लायक हो चुका था।
अब जानवर आए। परमेश्वर ने उनमें से सात प्रजातियाँ और अन्य से दो को लिया। छोटी और बड़ी पक्षियाँ, छोटे और लम्बे जानवरों को सन्दूक में रखा गया।
जानवरों को लादते समय नोह को कदाचित लोगों ने अपमानित किया। वे लोग परमेश्वर के विरूद्ध पाप करने से नहीं चूके। उनलोगों को सन्दूक में प्रवेश करने को नहीं कहा गया।
अंततः सभी पशु और पक्षी लाद लिए गए। “सन्दूक में आ जाओ”, परमेश्वर ने नोह को आमंत्रित किया। “तुम और तुम्हारा परिवार।” नोह, उनके तीनों बेटे तथा उनकी पत्नियाँ सन्दूक में प्रवेश कर गए। और तब परमेश्वर ने दरवाजा बन्द कर दिया।
तब वर्षा आरंभ हुई। चालीस दिनों तक दिन और रात मूसलाधार बारिस होती रही।
गाँव और शहरों के ऊपर से बाढ़ का पानी बहने लगा। जब बारिश रूकी तो यहाँ तक की पहाड़ भी पानी में डूब चुका था। हवा साँस लेने वाला प्रत्येक प्राणी मर चुका था।
जैसे-जैसे पानी बढता, सन्दूक ऊपर तैरता। अंदर अँधेरा, उबड़-खाबड़, और डरावना हो सकता था, पर सन्दूक नोह को बाढ़ से पनाह देता रहा।
पाँच महीने के बाढ़ के बाद, परमेश्वर ने सूखी हवा भेजी। धीरे-धीरे सन्दूक आरारत पहाड़ पर पहुँच गया। जबतक पानी नीचे नहीं चला गया नोह वहीं पर चालीस दिनों तक ठहरा रहा।
नोह ने सन्दूक खोलकर एक कौआ और एक बत्तख को भेजा। कहीँ भी उसे सूखा और साफ जगह नहीं मिला, इसलिए बत्तख नोह के पास वापसआ गया।
एक सप्ताह बाद नोह ने फिर प्रयास किया। बत्तख अपनी चोंच में जैतून की एक नयी पत्ती लेकर वापस आया। अगले सप्ताह नोह ने जाना कि अब पृथ्वी सूख चुकी है क्योंकि बत्तख वापस नहीं आया।
परमेश्वर ने नोह से कहा सन्दूक सेनिकलने का समय आ गया है। नोह और उसका परिवार, साथ-साथ सन्दूक से जानवरों को निकाला।
नोह परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ था। उसने परमेश्वर रखने का एक टेबुल बनाया तथा उसपर परमेश्वर की पूजा की जिसने उसे इतने नृशंस बाढ़ से बचाया था।
परमेश्वर ने नोह को एक अद्भुत वचन दिया। मनुष्य के पापों के न्याय हेतु वह कभी भी बाढ़ नहीं भेजेगा। उन्होंने अपने वचन याद दिलाया। इन्द्रधनुष परमेश्वर के वचन की निशानी थी।
बाढ़ के बाद नोह और उसके परिवार ने नयी जिन्दगी शुरू की। उन दिनों उनके वंशज से पूरी पृथ्वी भर गई। दुनिया के सभी राष्ट्रवासी नोह और उसके बच्चों से ही आते हैं।
समाप्त
About this Plan

ये सब कैसे शुरु हुआ? हम कहां से आए थे? दुनिया में इतनी दुःख क्यों है? क्या कोई उम्मीद है? क्या मृत्यु के बाद जीवन है? जैसे ही आप दुनिया के इस सच्चे इतिहास को पढ़ते हैं, जवाब पाएं।
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