अउर प्रेम करँइ बाला मनई, अपने जीबन माहीं धीरज रक्खत हय, दुसरे के ऊपर किरपा करत हय; अउर दुसरे के ऊपर जलन नहीं रक्खय; अउर उआ खुद के बड़ाई नहीं करय; अउर उआ घमन्डिव नहीं होय, अउर उआ दुसरे के साथ अनुचित बेउहार नहीं करय, उआ केबल अपनय भर भलाई नहीं चाहय, अउर उआ हरबिन क्रोधित नहीं होय, अउर जे कोऊ ओखे साथ बुरा बेउहार करत हें, त उनसे उआ बदला नहीं लेय।