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रोमियों 5:3-4

रोमियों 5:3-4 DGV

न सिर्फ़ यह बल्कि हम उस वक़्त भी फ़ख़र करते हैं जब हम मुसीबतों में फँसे होते हैं। क्योंकि हम जानते हैं कि मुसीबत से साबितक़दमी पैदा होती है, साबितक़दमी से पुख़्तगी और पुख़्तगी से उम्मीद।

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रोमियों 5:3-4 - न सिर्फ़ यह बल्कि हम उस वक़्त भी फ़ख़र करते हैं जब हम मुसीबतों में फँसे होते हैं। क्योंकि हम जानते हैं कि मुसीबत से साबितक़दमी पैदा होती है, साबितक़दमी से पुख़्तगी और पुख़्तगी से उम्मीद।रोमियों 5:3-4 - न सिर्फ़ यह बल्कि हम उस वक़्त भी फ़ख़र करते हैं जब हम मुसीबतों में फँसे होते हैं। क्योंकि हम जानते हैं कि मुसीबत से साबितक़दमी पैदा होती है, साबितक़दमी से पुख़्तगी और पुख़्तगी से उम्मीद।रोमियों 5:3-4 - न सिर्फ़ यह बल्कि हम उस वक़्त भी फ़ख़र करते हैं जब हम मुसीबतों में फँसे होते हैं। क्योंकि हम जानते हैं कि मुसीबत से साबितक़दमी पैदा होती है, साबितक़दमी से पुख़्तगी और पुख़्तगी से उम्मीद।रोमियों 5:3-4 - न सिर्फ़ यह बल्कि हम उस वक़्त भी फ़ख़र करते हैं जब हम मुसीबतों में फँसे होते हैं। क्योंकि हम जानते हैं कि मुसीबत से साबितक़दमी पैदा होती है, साबितक़दमी से पुख़्तगी और पुख़्तगी से उम्मीद।रोमियों 5:3-4 - न सिर्फ़ यह बल्कि हम उस वक़्त भी फ़ख़र करते हैं जब हम मुसीबतों में फँसे होते हैं। क्योंकि हम जानते हैं कि मुसीबत से साबितक़दमी पैदा होती है, साबितक़दमी से पुख़्तगी और पुख़्तगी से उम्मीद।