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मत्तियाह 11

11
प्रभु येशु और योहन
मत्तियाह 13:8-9,43; मरकुस 4:8-9,23; 7:16; लूकस 7:18-35; 8:8; 14:35
1जब गुरु येशु अपने बारह शिष्यों को ये आदेश दे चुके तब वह वहाँ से चले गए और गलील प्रदेश के आस-पास के नगरों में लोगों को शिक्षा देने और उन्हें शुभ संदेश सुनाने लगे।
2जब समर्पण-स्‍नान दाता योहन ने मुक्‍तिदाता येशु के कामों के बारे में सुना, उस समय योहन जेल में थे। उन्होंने अपने शिष्यों+ को गुरु येशु के पास यह पूछने के लिए भेजा, 3“क्या आने वाले मुक्‍तिदाता आप ही हैं, या हम किसी और का इंतज़ार करें?”
4प्रभु येशु ने उनको उत्तर दिया, “जाओ और जो तुमने मुझे कहते और करते देखा है वह सब योहन को बताओ कि 5अंधे देखते हैं, लँगड़े चलते हैं, कोढ़ी ठीक किए जाते हैं, बहरे सुनते हैं, मृत लोग ज़िन्दा किए जाते हैं और गरीबों को शुभ संदेश सुनाया जाता है। 6परमात्मा उसे आशीर्वाद दें जो मानता है कि मैं वही मुक्‍तिदाता हूँ जो आने वाला था।”
7योहन के शिष्य वापस जा ही रहे थे कि प्रभु येशु योहन के बारे में भीड़ से कहने लगे, “तुम सुनसान जगह में क्या देखने गए थे? क्या हवा से हिलती हुई लंबी घास को? 8यदि यह नहीं, तो तुम क्या देखने गए थे? ऐसे मनुष्य को जो कीमती कपड़े पहनता है? जो लोग महंगे कपड़े पहनते हैं, वे महलों में रहते हैं! 9अब बताओ, तुम क्या देखने गए थे? परमात्मा के प्रवक्‍ता को देखने? हाँ, मैं तुमसे कहता हूँ, वह परमात्मा के प्रवक्‍ता से भी महान व्यक्‍ति हैं। 10उन्हीं के बारे में परमात्मा-ग्रंथ में यह लिखा है,
‘देखो, मैं तुम्हारे आगे अपना दूत भेज रहा हूँ,
वह तुम्हारे आगे तुम्हारा मार्ग तैयार करेगा।’#मलाकी 3:1; निर्गमन 23:20
11“मैं तुमसे सच कहता हूँ, जो महिलाओं से पैदा हुए हैं उनमें समर्पण-स्‍नान दाता योहन से महान कोई नहीं हुआ। तो भी परमात्मा के परमस्वर्ग के साम्राज्य में छोटे से छोटा व्यक्‍ति योहन से अधिक महान है।
12“समर्पण-स्‍नान दाता योहन के समय से अब तक परमात्मा का साम्राज्य शक्‍ति से खुल गया है और उसमें जाने वाले पूरे जोश से उसे अपना रहे हैं।#11:12 शक्‍ति से खुल गया है - सभवतः प्रभु येशु परमात्मा के प्रवक्‍ता मिका (मिका 2:12-13) की भविष्यवाणी के बारे में कह रहे थे जिसमें कहा गया, “चरवाहा-महाराजा” द्वार को शक्‍ति से तोड़ेंगे और उनके पीछे लोग भी शक्‍ति से द्वार में प्रवेश करेंगे। योहन और जो लोग प्रभु येशु में आस्था रखते हैं उनके पीछे चलकर परमात्मा के साम्राज्य में पूरे जोश से उसे अपना रहे हैं। 13समर्पण स्‍नान दाता योहन के आने तक सब परमात्मा के प्रवक्‍ता और मोशे के नियम की पुस्तकें परमात्मा के साम्राज्य के दिव्य संदेश सुनाती रहीं। 14योहन वह व्यक्‍ति हैं जिनके बारे में परमात्मा के प्रवक्‍ता बात कर रहे थे जब उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि परमात्मा के प्रवक्‍ता एलियाह आएँगे। 15जिसके कान खुले हों वह सुन ले!
16“मैं आज के लोगों की तुलना किससे करूँ? ये सार्वजनिक जगहों में बैठे हुए बच्चों के समान हैं जो एक-दूसरे को पुकार कर कहते हैं,
17‘हमने तुम्हारे लिए बाँसुरी पर खुशी का गीत बजाया,
पर तुम न नाचे।
हमने दुख भरे गीत गाए,
पर तुम न रोए।’
18“योहन उपवास रखने और जंगल में अकेले रहने आए थे, और वे कहते हैं कि उसमें अशुद्ध आत्मा है। 19तेजस्वी मानव-पुत्र आया और लोगों के साथ मिलने-जुलने और खाने-पीने में समय बिताया, तो लोग कहते हैं, ‘देखो, पेटू और पियक्कड़, बेईमान टैक्स लेने वालों और पापियों का दोस्त!’ लेकिन जब कोई व्यक्‍ति परमात्मा से समझदारी प्राप्त करता है, तो उसके कामों में उसकी झलक दिखती है।”
भक्‍तिहीन नगरों को धिक्कार
लूकस 10:13-15
20तब प्रभु येशु उन नगरों को फटकारने लगे जिनमें उन्होंने बहुत से चमत्कार किए थे, क्योंकि उनके निवासियों ने अपने बुरे कर्मों से पश्‍चाताप नहीं किया था। 21प्रभु येशु ने कहा, “खोराज़िन नगर, तुझे अपने पापों का परिणाम भुगतना होगा! बैथसैदा नगर, तुझे भी अपने पापों का परिणाम भुगतना होगा! जो चमत्कार तुममें किए गए, यदि वे सोर और सीदोन शहरों में किए जाते तो उनके निवासियों ने शोक के कपड़े पहनकर और राख में बैठकर अपने बुरे कर्मों से पश्‍चाताप कर लिया होता। 22मैं तुमसे कहता हूँ, अच्छे और बुरे कर्मों के न्याय के दिन तुम्हारे मुकाबले सोर और सीदोन शहरों की दशा अधिक अच्छी होगी।
23“तुम कफरनहूम शहर के लोगो, क्या तुम परमस्वर्ग तक जाने की सोच रहे हो? नहीं, तुम तो मृत्युलोक में गिरोगे! क्योंकि जो चमत्कार तुम्हारे शहर में किए गए, यदि वे सदोम शहर में किए जाते तो परमात्मा द्वारा उसका विनाश नहीं होता। 24मैं तुमसे कहता हूँ, अच्छे और बुरे कर्मों के न्याय के दिन तुम्हारे मुकाबले सदोम के लोगों की दशा अधिक अच्छी होगी।”
बालक-समान निर्दोष मन
लूकस 10:21-22
25उस समय प्रभु येशु ने यह कहा, “हे पिता परमात्मा, आकाश और पृथ्वी के मालिक, मैं धन्यवाद देता हूँ कि आपने यह सच ज्ञानियों और बुद्धिमानों से गुप्त रखा और आम लोगों पर प्रकट किया। 26हे पिता परमात्मा, आपने ऐसा इसलिए किया क्योंकि इससे आपको बहुत खुशी मिली।
प्रेमपूर्ण निमंत्रण
27“मेरे पिता परमात्मा ने अपना सारा अधिकार मुझे सौंप दिया है। पिता परमात्मा के अलावा मुझ पुत्र को अच्छी तरह कोई नहीं जानता। और मुझ पुत्र के अलावा पिता परमात्मा को अच्छी तरह कोई नहीं जानता है। और पुत्र जिसको भी चाहे पिता परमात्मा को समझने का ज्ञान दे सकता है।
28“हे सब थके और बोझों से दबे लोगो, मेरे पास आओ और मैं तुम्हें शांतिदायक समाधान दूँगा। 29अपने आप को मुझसे जोड़ लो#11:29 अपने आप को मुझसे जोड़ लो - या, “मेरा जुआ अपने पर ले लो।” और मुझसे सीखो, क्योंकि मैं कठोर नहीं हूँ और मेरा मन कोमल है। मुझ से जुड़कर तुम मेरी शीतल छाया में आराम पाओगे। 30मेरे साथ चलना आसान है और मेरी शिक्षाएँ बोझ नहीं हैं।”

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