YouVersion Logo
Search Icon

योहन 16

16
मुक्‍तिदाता येशु की चेतावनी
1प्रभु येशु ने आगे कहा, “मैंने तुमसे यह सब इसलिए कहा कि जब लोग तुम्हें सताएँ तब तुम भक्‍ति के मार्ग से भटक न जाओ। 2वे तुम्हें यहूदी सत्संग भवनों से निकाल देंगे। और इतना ही नहीं, वह समय आ रहा है जब तुम्हारे हत्या करने वाले समझेंगे कि वे ऐसा करने से परमात्मा की सेवा कर रहे हैं। 3वे इस तरह के कार्य करेंगे, क्योंकि वे न तो पिता परमात्मा को जानते हैं और न मुझे। 4मैंने तुमसे ये बातें इसलिए कहीं हैं कि जब ये सब होने लगे तो तुम्हें याद आए कि मैंने तुमको पहले ही सावधान कर दिया था।
परमस्वर्ग की ओर प्रस्थान
“मैंने तुमको पहले ये बातें नहीं बताईं, क्योंकि मैं तुम्हारे साथ था। 5परंतु अब मैं अपने भेजने वाले के पास जा रहा हूँ और तुममें से कोई मुझसे नहीं पूछ रहा है कि मैं कहाँ जा रहा हूँ। 6यह पूछने के बजाय, तुम्हारे मन सिर्फ इसलिए दुखी हो गया कि मैंने तुम्हें ये बातें बताई हैं। 7मैं तुम्हें सच्चाई प्रकट करता हूँ, यह तुम्हारे लिए लाभदायक है कि मैं जा रहा हूँ, क्योंकि यदि मैं न जाऊँ तो तुम्हारे मदद करने वाला तुम्हारे पास नहीं आएगा। परंतु यदि मैं जाऊँ तो मैं उसे तुम्हारे पास भेजूँगा।
8“मदद करने वाला आएगा और इस संसार के लोगों के पाप, परमात्मा की आज्ञाओं का पालन और न्याय के बारे में जो सोच है उसे गलत साबित करेगा। 9उनकी सोच पाप के बारे में गलत है, क्योंकि वे सोचते हैं कि मुझ पर आस्था रखना जरूरी नहीं है। 10परमात्मा की आज्ञा का पालन करने के बारे में, वे कहते हैं कि मैं उनका पालन नहीं करता। परंतु मदद करने वाली पवित्र आत्मा मेरे पिता परमात्मा के पास जाने के बाद जहाँ तुम मुझे नहीं देख सकते तुम्हें यह तब भी साबित करता रहेगा कि मैं उनका पालन करता हूँ। 11न्याय के बारे में वे यह सोचते हैं कि मुझे दोषी साबित किया जाएगा, परंतु मदद करने वाली पवित्र आत्मा यह दिखागी कि इस संसार का शासक शैतान ही वास्तव में दोषी साबित किया जाएगा।
12“मुझे तुमसे और बहुत कुछ कहना है, परंतु अभी तुम इनको सह नहीं सकते। 13जब मदद करने वाली सत्य-आत्मा आएगी, तब वह तुम्हें सम्पूर्ण सत्य में ले जाने के लिए मार्गदर्शन करेगी। वह अपनी ओर से कुछ न कहेगी, परंतु जो कुछ सुनेंगी, वही कहेगी और भविष्य में होने वाली बातें तुम्हें बताएगी। 14सत्य-आत्मा मेरा तेज प्रकट करेगी, क्योंकि उसे मेरी ओर से जो मिला है, वह वही बताएगी। 15सब जो पिता परमात्मा का है, वह मेरा है। इस कारण मैंने कहा कि जो मेरा है, पवित्र आत्मा मुझसे प्राप्त करेगी और तुमको बताएगी।”
16गुरु येशु ने अपने शिष्यों से कहा, “थोड़े समय बाद तुम मुझे नहीं देखोगे। और उसके थोड़े समय बाद ही तुम मुझे फिर से देखोगे।”
17इस पर उनके कुछ शिष्य आपस में कहने लगे, “इसका क्या मतलब है कि जो यह हमसे कह रहे हैं, ‘थोड़े समय बाद तुम मुझे नहीं देखोगे,’ और ‘उसके थोड़े समय बाद ही तुम मुझे फिर से देखोगे,’ और ‘मैं पिता परमात्मा के पास जा रहा हूँ’?” 18वे कहने लगे, “यह ‘थोड़े समय बाद’ क्या है जिसके बारे में यह कह रहे हैं? हम नहीं जानते कि यह क्या बोल रहे हैं।”
19प्रभु येशु जानते थे कि वे उनसे कुछ पूछना चाहते हैं, इसलिए उसने उनसे कहा, “क्या तुम आपस में इस बात पर विचार कर रहे हो कि मैंने कहा, ‘थोड़े समय बाद तुम मुझे नहीं देखोगे, फिर थोड़े समय बाद ही तुम मुझे देखोगे?’ 20मैं तुम पर सच्चाई प्रकट करता हूँ, जो कुछ मेरे साथ होगा उसके लिए तुम रोओगे और शोक करोगे, परंतु इस संसार के लोग खुशियाँ मनाएँगे। तुम शोकित होंगे, किंतु तुम्हारा शोक खुशी में बदल जाएगा।
21“जब स्त्री प्रसव-पीड़ा में होती है तब उसे दर्द होता है, क्योंकि उसके प्रसव का समय आ पहुँचा है। पर जब वह बच्‍चे को जन्म दे देती है तब बच्‍चे के आने की खुशी में अपना दर्द भूल जाती है। 22इसी प्रकार तुम अब शोक में हो,+ परंतु तुम मुझे फिर से देखोगे और तुम्हारा मन खुश होगा और तुमसे तुम्हारी खुशी कोई नहीं छीन सकेगा। 23जब मैं नहीं रहूँगा तो तुम मुझसे कुछ नहीं माँगोगे। परंतु मैं तुम पर सच्चाई प्रकट करता हूँ, यदि तुम मेरे नाम में पिता परमात्मा से कुछ माँगोगे तो वह तुम्हें देंगे। 24अब तक तुमने मेरे नाम से कुछ नहीं माँगा। माँगो, और तुम पाओगे ताकि तुम पूरी तरह से खुश होओ।
भ्रष्ट संसार पर विजय
25“इस समय मैंने ये सब बातें तुम्हें कहावतों का प्रयोग करके बताई। परंतु समय आ रहा है कि मैं तुमसे ऐसे न बोलूँगा, परंतु पिता परमात्मा के बारे में साफ़-साफ़ कहूँगा। 26मैं यह कह रहा हूँ कि उस समय मुझे तुम्हारी ओर से पिता परमात्मा से माँगने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि उस समय तुम मेरे नाम से सीधे पिता परमात्मा से माँगोगे। 27पिता परमात्मा स्वयं तुमसे प्रेम करता है, क्योंकि तुमने मुझसे प्रेम किया है और विश्‍वास किया है कि मैं पिता परमात्मा से आया हूँ। 28मैं पिता परमात्मा से संसार में आया हूँ। और अब मैं संसार को छोड़कर पिता परमात्मा के पास जा रहा हूँ।”
29उनके शिष्यों ने कहा, “अब आप हमें कहावतों में नहीं परंतु साफ शब्दों में समझा रहे हैं। 30अब हम समझ गए हैं कि आप सबकुछ जानते हैं। आपको किसी से यह पूछने की भी ज़रूरत नहीं है कि वे क्या सोच रहे हैं! इस कारण हम विश्‍वास करते हैं कि आप परमात्मा से हैं।”
31प्रभु येशु ने उत्तर दिया, “तुम्हें अब विश्‍वास हो रहा है! 32पर देखो, समय आ रहा है, और यह बहुत जल्द होगा कि तुम तितर-बितर हो जाओगे और तुम मुझे अकेला छोड़कर अपने-अपने घर भाग जाओगे। पर याद रखना, मैं अकेला नहीं हूँ। मेरा पिता परमात्मा मेरे साथ हैं। 33ये बातें मैंने तुमसे इसलिए कहीं कि तुम मुझ में शांति पाओ। इस संसार में तुम्हें बहुत कष्ट मिलेगा, परंतु हिम्मत बाँधे रखना, क्योंकि मैंने संसार को जीत लिया है।”

Currently Selected:

योहन 16: MYG

Highlight

Copy

Compare

Share

None

Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in